ट्रंप की इमिग्रेशन विरोधी नीतियों से भारतीय आईटी कंपनियां चौकन्नी

  • uploaded on : 2017-01-30 13:00:25
ट्रंप की इमिग्रेशन विरोधी नीतियों से भारतीय आईटी कंपनियां चौकन्नी
 

 दिल्ली/बेंगलुरु डॉनल्ड ट्रंप सरकार अमेरिका में एच-1बी वीजा पर आने वाले प्रवासियों की जिंदगी मुश्किल कर सकती है। भारतीय आईटी कंपनियां अपने एंप्लॉयीज को वहां भेजने के लिए एच-1बी वीजा का काफी इस्तेमाल करती हैं। वाइट हाउस जिन ड्राफ्ट ऑर्डर्स पर विचार कर रहा है, उनमें से चार लीक हुए हैं। vox.com के मुताबिक, 'इनमें से एक लीगल इमिग्रेशन को कम करने से जुड़ा है। इसमें कानूनी तौर पर अमेरिका आने वालों की संख्या घटाकर अमेरिकी रोजगार बढ़ाने की बात कही गई है।' दूसरे उपायों के साथ ड्राफ्ट में 'विदेशी छात्रों की कड़ी निगरानी' और एच-1बी वीजाधारकों को काम पर रखने वाली कंपनियों की जांच की बात कही गई है।
ड्राफ्ट में कहा गया है कि होमलैंड सिक्यॉरिटी ऑफिशल्स यह जांच करेंगे। ओबामा सरकार ने एच-1बी वीजा धारकों की पत्नियों को अमेरिका में काम करने का अधिकार दिया था, ट्रंप सरकार उसे पलटने की सोच रही है। अगर इस एग्जिक्युटिव ऑर्डर को लागू किया जाता है तो इससे भारत से अमेरिका में स्किल्ड प्रफ़ेशनल की आवाजाही पर बहुत बुरा असर पड़ेगा। इस संबंध में नैसकॉम प्रेजिडेंट आर चंद्रशेखर ने कॉमेंट करने से मना कर दिया। उन्होंने कहा, 'हमारा मानना है कि स्किल्ड इमिग्रेशन से ग्लोबल इकॉनमी को फायदा होता है। इसी वजह से आज सिलिकॉन वैली में दुनिया का टैलंट मौजूद है।' उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका में बढ़ते संरक्षणवाद पर भारतीय आईटी इंडस्ट्री की नजर है।
बता दें कि ट्रंप ने पिछले शुक्रवार को एक एग्जिक्युटिव ऑर्डर के जरिए अमेरिका में सात मुस्लिम बहुल देशों से शरणार्थियों के आने पर रोक लगा दी थी। इससे वहां अफरातफरी का माहौल बन गया। इसके बाद न्यू यॉर्क के एक फेडरल जज ने इस आदेश पर इमर्जेंसी स्टे लगा दिया, लेकिन इसे लेकर कुछ जगहों पर भ्रम बना हुआ है। इस आदेश का असर सीरिया, इराक, ईरान, सोमालिया, सूडान, यमन और लीबिया के कानूनी प्रवासियों पर पड़ेगा।
गूगल, फेसबुक, माइक्रोसॉफ्ट, ट्विटर, ऊबर और कई अन्य कंपनियों ने अमेरिकी सरकार की एंटी-इमिग्रेशन नीतियों की आलोचना की है। भारतीय आईटी कंपनियां इन सात देशों के एंप्लॉयीज को काम पर नहीं रखतीं, लेकिन एच-1बी वीजा और मुसलमानों के खिलाफ ट्रंप सरकार के सख्त रुख के चलते वे भी डरी हुई हैं।
देश की एक बड़ी आईटी सर्विसेज कंपनी के सीनियर एग्जिक्युटिव के मुताबिक, 'शुक्रवार को जो फैसला हुआ, उससे हम हैरान हैं। मुझे लगता है कि ट्रंप के कार्यकाल के दौरान हमें इसकी आदत डालनी पड़ेगी।' उन्होंने कहा कि आने वाले कुछ दिनों में अमेरिका को लेकर कंपनी के बड़े अधिकारी नीति पर विचार करेंगे। एक अन्य आईटी कंपनी ने कहा कि वह शुक्रवार के फैसले से परेशान नहीं है, लेकिन अगर ट्रंप सरकार के किसी फैसले से भारतीय आईटी इंडस्ट्री को नुकसान होता है तो उसके मुताबिक कदम उठाया जाएगा।