सुरक्षा परिषद प्रस्ताव पर वोटिंग से दूर रहा अमेरिका, इजरायल ने कहा यह 'घिनौना', 'शर्मनाक'

  • uploaded on : 2016-12-25 09:27:05
सुरक्षा परिषद  प्रस्ताव पर वोटिंग से दूर रहा अमेरिका, इजरायल ने कहा यह 'घिनौना', 'शर्मनाक'
 

जेरुसलम इजरायल ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में इजरायल विरोधी एक प्रस्ताव को पारित होने देने के लिए अमेरिका की कड़ी आलोचना की है। परिषद  के इस प्रस्ताव में वेस्ट बैंक और पूर्वी जेरुसलम में इजरायल की बस्ती के निर्माण की निंदा की गई थी। ओबामा प्रशासन पर इस प्रस्ताव को पारित होने से रोकने के लिए काफी दबाव था। बावजूद इसके अमेरिका वोटिंग से दूर रहा और प्रस्ताव पारित होने दिया। इजरायल ने उसके इस कदम को 'घिनौना' और 'शर्मनाक' बताया है। इजरायल के प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी किए गए बयान में कहा गया, 'संयुक्त राष्ट्र में इजरायल विरोधी प्रस्ताव को इस्राइल स्पष्ट रूप से खारिज करता है। वह इसके मुताबिक नहीं चलेगा।' प्रधानमंत्री कार्यालय ने कहा, 'सीरिया के नरसंहार को रोकने के लिए सुरक्षा परिषद कुछ नहीं करती, लेकिन वह मिडल ईस्ट के एकमात्र लोकतांत्रिक देश इजरायल को अलग कर रही है। ओबामा प्रशासन ना सिर्फ इजरायल को संयुक्त राष्ट्र के इस उत्पीड़न से बचाने में असफल रहा बल्कि ऐसा करने में उसका (संयुक्त राष्ट्र) साथ दिया।' इजरायल के प्रधानमंत्री कार्यालय ने कहा कि इजरायल इस बेतुके प्रस्ताव से हुए नुकसान की भरपाई के लिए अमेरिका के होने वाले राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के साथ काम करने को लेकर विचार कर रहा था। इस बयान पर ट्रंप ने तुरंत ट्वीट कर कहा, 'जहां तक संयुक्त राष्ट्र की बात है, 20 जनवरी के बाद हालात अलग होंगे।' ट्रंप का इशारा था कि उनके राष्ट्रपति बनने के बाद इजरायल और अमेरिका के रणनीतिक संबंध सामान्य रूप से चलेंगे।
प्रस्ताव पर अमेरिका के रुख पर इजरायल के ऊर्जा मंत्री ने चैनल-2 से बात करते हुए कहा, 'दोस्त इस तरह व्यवहार नहीं करते।' उन्होंने कहा, 'अमेरिका ने मिडल ईस्ट के एकमात्र सहयोगी इजरायल का बहिष्कार किया है। आठ साल की मित्रता और सहयोग के बाद ओबामा का यह रवैया है।' वीटो मतदान से दूर रहने पर इजरायल के राजदूत डैनी डैनन ने भी अमेरिका की आलोचना की। उन्होंने कहा, 'हमें उम्मीद थी इजरायल का सबसे अच्छा दोस्त अमेरिका अपनी दशकों लंबी नीति के तहत व्यवहार करेगा और इस एकतरफा प्रस्ताव पर वीटो देगा।' उन्होंने कहा कि इसमें कोई 'शक नहीं' कि अगला अमेरिकी प्रशासन एक नए युग में प्रवेश करेगा।
प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अपने न्यू ज़ीलैंड और सेनिगॉल के राजदूतों को विचार-विमर्श करने के लिए वापस बुला लिया है। ये दोनों देश शुक्रवार को हुई वोटिंग में भाग लेने वाले देशों में शामिल थे। प्रधानमंत्री कार्यालय ने बताया कि अगले महीने होने वाले सेनिगॉल के विदेश मंत्री का दौरा रद्द कर दिया जाएगा और वहां जारी तमाम सहायक प्रॉजेक्ट पर रोक लगाई जाएगी।