मुलायम के बयान से उठ रहे न्यायपालिका पर सवाल

  • uploaded on : 2016-10-27 17:58:51
मुलायम के बयान से उठ रहे न्यायपालिका पर सवाल
 

गत दिवस समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव ने कार्यकर्ताओं की सभा में स्पष्ट रूप से स्वीकार किया कि अमर सिंह ने उन्हें माननीय उच्चतम न्यायालय और सीबीआई से बचाया। 
 वरना, आय से अधिक सम्पत्ति मामले में मुझे सात वर्ष की सजा हो सकती थी। उनके इस बयान ने समाज के न्यायप्रिय लोगों के मन में न्यायपालिका तथा केन्द्रीय जांच एजेंसियों के बारे में यह सोचने को बाध्य कर दिया है कि क्या जोड़तोड़ से न्यायपालिका निर्णय लेती है। 
आश्चर्य तो तब होता है जब खुलेआम कांग्रेस के  महान नेता एवं स्वतंत्रता आन्दोलन के कर्णधारक स्व. हुमायंू कबीर के पुत्र उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायमूर्ति अल्तमस कबीर के बारे में यह कहा जाता है कि उनके समय में यह घटना घटी थी। यही नहीं, सीबीआई जांच को प्रभावित करने का काम दूसरे न्यायमूर्ति आफताब आलम ने किया था। उन्होंने अपने भतीजे जवीद अहमद जो उस समय सीबीआई के संयुक्त निदेशक थे, उनके माध्यम से जांच प्रभावित कराई थी। जिसको पारितोेषिक के तौर पर उत्तर प्रदेश का पुलिस महानिदेशक बनाया  गया है। आमजन मानस में न्यायपालिका और कार्यपालिका के प्रति इस तरह का प्रचार होने से लोगों का विश्वास सरकारों और राजनेताओं के प्रति उठना स्वाभाविक ही है। 
मुलायम सिंह यादव को खुद चाहिये कि या तो वो अपने इस तरह के बयानों को वापस लें और जावीद अहमद जैसे अधिकारियों को हटाने के लिए मुख्यमंत्री से कहें। यदि इसमें मुलायम सिंह जी खामोश रहते हैं तो प्रदेश और देश के जागरूक नागरिक आगे आकर इस मामले की गहराई से जांच के लिए सरकार व न्यायपालिका को मजबूर करें, क्योंकि न्यायपालिका और कार्यपालिका से जनता का विश्वास उठ गया तो आगे आने वाले समय में देश में एक ऐसा  वातावरण बनेगा जिसे किसी भी शासक को संभालना मुश्किल हो जायेगा।