‘निष्पक्ष प्रतिदिन’ न झुका है न कभी झुकेगा

  • uploaded on : 2016-10-21 12:49:18
 ‘निष्पक्ष प्रतिदिन’ न झुका है न कभी झुकेगा
 

निष्पक्ष प्रतिदिन आज 35 वर्ष को पूरा करके 36वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है। इतना लम्बा समय भ्रष्टाचारियों से लड़ना आग के शोलों पर चलने के बराबर रहा है। बीच में अनेक अड़चनें आईं, भ्रष्ट अफसरों ने गैर-कानूनी तरीके से समाचार पत्र का घोषणा पत्र रद्द कराने का दुसाहस किया और समाचार पत्र को आर्थिक नुकसान पहुंचाने की भी कुत्सित 
कोशिश की गई, लेकिन आज भी इस देश की न्याय पालिका ऐसे भ्रष्ट अफसरों के कारनामों को रोकती रही है। उत्तर प्र्रदेश में पिछले 25 वर्षों में ऐसी सरकारें आयीं, जो अधिकारियों के सहारे धनार्जन करने के प्रयास में रही हैं। 
आपका समाचार पत्र कभी झुका नहीं, रूका नहीं और अविरल गति से अपने मतव्य की ओर बढ़ता रहा। इसका गवाह हमारे पाठक स्वयं हैं। अभी तीन दिन पहले की बात है। मैं लखनऊ एयरपोर्ट से दिल्ली जा रहा था। उस समय दो सीनियर पुलिस अधिकारी मेरे पास आए और उन्होंने कहा कि साहब, हम आपके लेखनी को सलाम करते हैं। उन्होंने ये भी कहा कि आपके द्वारा लिखी गयीं खबरें तलवार की धार की तरह वार करती हैं, वैसे तो आजकल विज्ञापन तथा पैसे के लिए अखबार निकल रहे हैं। हमारे समाचार पत्र को चलते रहने में कर्मचारियों की भी महत्वपूर्ण भूमिका है, क्योंकि कम से कम वेतन लेकर कर्मचारी आज भी निष्ठा से काम करते हैं। 
आज देश और समाज की जो हालत है, वो किसी से छिपी नहीं है। हर व्यक्ति समाज के प्रति अपने को समर्पित करने के बजाए धनार्जन की ओर बढ़ता दिखाई पड़ रहा है। मात्र 10 प्रतिशत ही लोग हैं, जो समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी का निर्वाह कर रहे हैं। 90 प्रतिशत ऐसे अधिकारी हैं जो जनसेवा के नाम पर नौकरी करने के बजाए धन कमाने के लिए सरकारी योजनाओं को पलीता लगा रहे हैं। जिसका परिणाम यह है कि विकास योजनाएं जो गांव में लोगों को नया जीवन दे सकती हैं, वो अधिकारी दोनों हाथों से लूट रहे हैं। इन परिस्थितियों में निष्पक्ष प्रतिदिन अखबार संघर्ष करता रहा है और आप लोगों के सहयोग से संघर्ष जारी रखने की लालसा है। 
केंद्र और प्रदेश की सरकारों में अपराधियों, पूंजीपतियों का वर्चस्व बढ़ता जा रहा है। कई घटनाएं ऐसी सामने आयी हैं जिनमें आरटीआई कार्यकताओं को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा है। यही नहीं, भ्रष्टाचार की लड़ाई लड़ने वाले लोगों को तरह-तरह से अपमानित करने का प्रयास जारी है, जिससे की उनका मनोबल टूटे और वो इस मुहिम को छोड़ दें। 
  मैं अपने पाठकों, शुभचिंतकों को विश्वास दिलाना चाहता हूं कि संकट चाहे जितना गहरा हो जाए, न हम झुके थे, न हम झुकेंगे, न हम रूके थे, न हम रूकेंगे। हमें सिर्फ आपके प्यार और सम्मान की जरूरत है।