खनन से कमाता रहा विभाग, ओवरलोडिंग हो गई वैध, रायल्टी में हो रहा है खेल

  • uploaded on : 2018-04-10 18:33:22
खनन से कमाता रहा विभाग, ओवरलोडिंग हो गई वैध, रायल्टी में हो रहा है खेल
 

लखनऊ जब आम लोग 200 रुपये प्रतिघन फुट की महंगी दरों पर मौरंग खरीदने को मजबूर थे तो उस समय खनन विभाग मोटी कमाई करने में लगा हुआ था। राजस्व बढ़ाने की फेर में जुटे अफसरों ने आम लोगों की परेशानी को समझने के बजाए सरकार का खजाना भरना जरूरी समझा। अब भी प्रदेश की 750 से अधिक खदानें चल नहीं पाईं हैं। बावजूद इसके रायल्टी चोरी धडल्ले से हो रही है। अपनी नाकामी छुपाने के लिए अफसरों ने ओवरलोडिंग को वैध कर दिया है। पिछले दरवाजे से लगभग 30 फीसदी तक ओवरलोडिंग का स्वीकृति दे दी गई है।लोगों की जेब कटती रही, विभाग का खजाना भरता गयाजब बालू-मौरंग का संकट था और लोग मजबूरी में महंगा माल खरीद रहे तो विभागीय अफसर दाम कम करने के प्रयासों के बजाए खजाना भरने में जुटे हुए थे। 2016-17 में 1547 करोड़ रुपये की आय हुई थी जो 2017-18 में बढ़कर 3200 करोड़ रुपये पर पहुंच गई। मौरंग के रेट 2017 में 200 रुपये प्रतिघन फिट के आसपास पहुंच गए थे बावजूद इसके विभाग ने 2016-17 में 1500 करोड़ रुपये के सापेक्ष 2017 में 2200 करोड़ रुपये कमाई कर ली। खदानों में खुलेआम रायल्टी चोरीमौरंग खदानों में ट्रांसपोर्टरों को लगभग 600 घनफिट माल का पैसा देना मजबूरी है। इससे कम माल तो मिल जाएगा लेकिन पैसे इतने वजन का ही देना होगा। इसके अलावा एक खेल और चल रहा है। खदान मालिक 1200 घनफिट तक माल लाद रहे हैं इसमें 600 घनफिट तक माल की रायल्टी ली जाती है बाकी 600 घनफिट बिना रायल्टी के ले जा सकते हैं। खनन अफसरों और पुलिस की मदद से यह खेल चल रहा है। इसमें सप्लायरों को बड़ी कमाई हो रही है। इसके बावजूद इसका फायदा आम लोगों को नहीं हो पा रहा है। बिना रायल्टी लाया हुआ माल भी बाजार में तय मूल्यों पर ही बिक रहा है।अफसरों की सुस्ती, लोगों की परेशानीखदानों को आवंटित करने के लिए ई-टेंडरिंग की प्रक्रिया पूरी होने के बाद विभाग को राजस्व मिल गया लेकिन विभागीय अफसरों ने इन खदानों को शुरू करने में दिलचस्पी नहीं दिखाई। हालात यह हैं कि तीन-तीन महीनें बाद भी खदानों पर खनन शुरू नहीं हो पा रहा है। मौरंग की 200 से अधिक खदानों में महज 40 ही पूरी या आंशिक तौर पर चल रही हैं।