मदरसे के छात्रों के एक हाथ में कुरआन, एक हाथ में कम्प्यूटर हो: डॉ. दिनेश शर्मा

  • uploaded on : 2018-04-07 21:02:22
मदरसे के छात्रों के एक हाथ में कुरआन, एक हाथ में कम्प्यूटर हो: डॉ. दिनेश शर्मा
 

लखनऊ प्रदेश के उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने कहा कि मुसलमान बच्चे दीनी तालीम के साथ ही समकालीन शिक्षा जरूर हासिल करें। उनके एक हाथ में कुरआन तो दूसरे हाथ में कम्प्यूटर होना चाहिए। जिससे वह वर्तमान आवयकताओं को पूरा कर सकें। वह दुबग्गा स्थित एक मदरसे में माहदुल फि़रदौस अलरहमानी के रजत जयन्ती उत्सव के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम के विजेता प्रतिभागियों के पुरस्कार वितरण समारोह में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे।डॉ. दिनेश शर्मा ने विशेष रूप से इस बात पर ज़ोर दिया कि मुसलमान बच्चे अधिक से अधिक दीनी तालीम प्राप्त करें और इस्लामी शिक्षाओं के सच्चे अनुयायी बनें। इस शिक्षा में किसी तरह की कमी न आने दें, क्योंकि सही मायने में इस्लामी शिक्षाओं के मानने वाले से बेहतर कोई हो ही नहीं सकता, पर साथ ही समकालीन शिक्षा जरूर हासिल करें। जिससे जो वर्तमान आवश्यकताएं हैं, उन्हें बेहतर तरीके से पूरा करने के योग्य बनें सकें। उन्होंने कहा कि अगर हम दीन व दुनिया दोनो से परिपूर्ण होंगे, तो हम समाज के लिए और अधिक उपयोगी होंगे। साथ ही हम सब मिलकर इस देश के विकास के पथप्रदर्शक और इस देश को उसका सही स्थान दिलाने में सफल होंगे।विशिष्ट अतिथि के रूप में कार्यक्रम में मौजूद ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती उर्दू अरबी फारसी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. माहरूख मिर्जा ने कहा कि प्रदेश सरकार ऐसे विश्वविद्यालय स्थापित करें, जहां पर केवल गीता और कुरआन के साझा कोर्स चलाए जाए। जिससे दोनों मजहब के बच्चे गीता और कुरआन के सही मायने समझ सकें, ताकि वह सभी धर्मो का आदर करें और एक अच्छे इंसान बन सकें। उन्होंने बच्चों को नसीहत देते हुए कहा कि आपके हाथ में पूरी कौम व मिल्लत की बागडोर है। आपकी जिम्मेदारियां हमसे कहीं ज्यादा हैं, इसलिए खूब मेहनत और लगन से इल्म हासिल करें और अपने आपको इस तरह तैयार करें कि इस समाज के लिए आप प्रकाशस्तम्भ बनें। समारोह की अध्यक्षता दारुल उलूम नदवतुल उलमा के प्रधानाचार्य मौलान डॉ. सईदुर रहमान आज़मी ने की। कार्यक्रम में मुख्य रूप से मौलाना अलाउद्दीन साहब, हाफिज अतीकुर रहमान साहब, मौलाना मोहम्मद फरमान नदवी साहब, मौलाना अब्दुल्लाह मखदूमी साहब, प्रो. सैयद हैदर अली, डॉ. फ़ख़रे आलम, डॉ. सौबान सईद, डॉ.नीरज शुक्ल, मौलाना मुतीउर्रहमान साहब, कारी बदरूद्दुजा साहब और मौलाना मोहम्मद जुनैद कुरैशी साहब शामिल थे।