गोर्शकोव की बढ़ी कीमत के कारणों का खुलासा राष्ट्रीय हित में नहीं किया जाना चाहिए: रक्षा मंत्रालय

  • uploaded on : 2018-04-01 19:31:50
गोर्शकोव की बढ़ी कीमत के कारणों का खुलासा राष्ट्रीय हित में नहीं किया जाना चाहिए: रक्षा मंत्रालय
 

नई दिल्ली रक्षा मंत्रालय ने दिल्ली उच्च न्यायालय में कहा है कि रूस ने नवीकृत विमान वाहकपोत ऐडमिरल गोर्शकोव की कीमत में बढोत्तरी की है और भारत द्वारा इसे स्वीकार किये जाने के कारणों का खुलासा राष्ट्रीय व राजनयिक हित में नहीं किया जाना चाहिए। केंद्रीय सूचना आयोग( सीआईसी) के आदेश को चुनौती देते हुए रक्षा मंत्रालय ने एक रिट याचिका के माध्यम से दावा किया है कि भारत और रूस के बीच अंतर- सरकारी समझौता इस तरह की विस्तृत जानकारियां देने पर रोक लगाता है और यह आरटीआई अधिनियम की धारा 8(1)(a) के छूट खंड के तहत आएगा।
सीआईसी के आदेश में सरकार से उन कारणों को बताने के लिए कहा गया था कि सरकार बढोत्तरी करने पर क्यों सहमत हुई थी। रिट याचिका में कहा गया है, 'खंड नौ में आईजीए विशेष रूप से यह बताता है कि वर्तमान समझौते की सामग्री का खुलासा न करने के साथ-साथ आपसी सहमति के बिना इसके कार्यान्वयन से संबंधित सभी पत्राचार और सूचनाओं के बारे में भी जानकारी का खुलासा नहीं किया जाए।' इस विमान वाहक की खरीद के लिए समझौते पर हस्ताक्षर वर्ष 2004 में तत्कालीन एनडीए सरकार द्वारा किये गये थे। उस समय इसकी कीमत 97.4 करोड़ डॉलर थी। 
वर्ष 2010 में इसकी कीमत को बढ़ाकर 2.35 अरब डॉलर कर दिया गया। भारत ने इस विमान वाहकपोत को नया नाम आईएनएस विक्रमादित्य दिया था। कीमत बढ़ाये जाने और अन्य मुद्दों के बारे में सुभाष अग्रवाल ने एक याचिका दायर की थी। सूचना आयुक्त अमिताभ भट्टाचार्य ने इस याचिका पर विस्तृत सुनवाई की थी और कीमत बढाये जाने के कारणों का खुलासा करने का आदेश देने से पहले सभी पक्षों को सुना था। अदालत ने अब अग्रवाल को इस मामले पर पांच अप्रैल को उसके समक्ष पेश होने के लिए कहा है। मंत्रालय ने कहा कि यदि विवरण का खुलासा हुआ, तो समझौते के उल्लंघन की वजह से 'भारत और रूस के बीच मधुर संबंध' प्रभावित होंगे और यह एक विदेशी राष्ट्र के साथ संबंधों के लिए नुकसानदायक होगा।