50 लाख अनमीटर्ड ग्रामीण उपभोक्ताओं पर 36 फीसदी बिजली का बोझ बढ़ा

  • uploaded on : 2018-03-30 19:13:45
50 लाख अनमीटर्ड ग्रामीण उपभोक्ताओं पर 36 फीसदी बिजली का बोझ बढ़ा
 

लखनऊ प्रदेश के लगभग 50 लाख अनमीटर्ड ग्रामीण विद्युत उपभोक्ताओं को एक अप्रैल से बिजली के लिए तकरीबन 34 फीसदी अधिक भुगतान करना होगा। प्रतिमाह तकरीबन 100 रुपये का बोझ बढ़ जाएगा। वर्तमान दरें 300 रुपये प्रति किलोवाट प्रतिमाह हैं वह एक अप्रैल 2018 से बढ़कर 400 रुपये प्रति किलोवाट प्रतिमाह हो जाएंगी। नियामक आयोग के आदेशानुसार यह व्यवस्था दिसम्बर 2017 में ही लागू कर दी गई थी।प्रदेश में अब भी 50 लाख से अधिक ऐसे ग्रामीण उपभोक्ता हैं जिनके पास कनेक्शन तो हैं लेकिन मीटर न होने के चलते उनसे फिक्स रेट पर वसूली की जाती है। ऐसे उपभोक्ताओं को नियामक आयोग के टैरिफ श्रेणी में एक अलग कैटगरी में रखकर उनकी दरें तय कर दी जाती हैं। इनमें अधिकांश छोटे किसान और गांव वाले हैं। चार माह में दोगुनी हो गईं दरेंजो ग्रामीण अनमीटर्ड विद्युत उपभोक्ता नवम्बर 2017 तक 180 रुपये प्रति किलोवाट प्रतिमाह देते थे, उसमें बढ़ोत्तरी करके 31 मार्च 2018 तक 300 रुपये और उसके बाद एक अप्रैल 2018 से 400 रुपये प्रति किलोवाट प्रतिमाह कर दिया गया। ग्रामीण अनमीटर्ड उपभोक्ताओं की दरों में यह लगभग 34 फीसदी की बढ़ोत्तरी हो जाएगी। उपभोक्ता परिषद विरोध मेंउपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश वर्मा की मांग है कि इस मुद्दे पर उपभोक्ता परिषद की पुनर्विचार याचिका आयोग में विचाराधीन है। ऐसे में उस पर निर्णय आने तक सरकार विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 108 के तहत आयोग को अनुरोध भेजकर बढ़ी दरों पर रोक लगाने की मांग करे। परिषद अध्यक्ष का कहना है कि 30 नवम्बर 2017 को उ0प्र0 पॉवर कारपोरेशन ने दबाव डालकर उपभोक्ताओं की बिजली दरों में व्यापक बढ़ोत्तरी करायी गयी थी। दरों में जो बढ़ोत्तरी हो रही है वह असंवैधानिक है क्योंकि उप्र पावर कार्पोरेशन व बिजली कम्पनियों ने मल्टीईयर टैरिफ प्रस्ताव के तहत केवल वर्ष 2017-18 का टैरिफ प्रस्ताव आयोग में दाखिल किया गया था और एक ही वित्तीय वर्ष पर सार्वजनिक सुनवाई हुई थी। ऐसे में जब तक नया टैरिफ दोबारा आयोग जारी न करे तब तक वर्ष 2017-18 की ही टैरिफ नियमानुसार लागू रहना चाहिए।