साउथ चाइना सी पर भारत-जापान के रुख में नरमी? संयुक्त घोषणापत्र में जिक्र नहीं

  • uploaded on : 2017-09-17 12:51:00
साउथ चाइना सी पर भारत-जापान के रुख में नरमी? संयुक्त घोषणापत्र में जिक्र नहीं
 

नई दिल्ली साउथ चाइना सी (SCS) के मुद्दे पर भारत और जापान लगातार चीन का विरोध करते रहे हैं। दोनों देश इस इलाके में परिवहन बंदिशें नहीं लगाने की बात करते हैं। हालांकि जापानी पीएम शिंजो आबे और पीएम नरेंद्र मोदी के बीच हाल में अहमदाबाद में हुई द्विपक्षीय बैठक में SCS का साफ-साफ जिक्र नहीं किया गया है। इसे दोनों देशों के SCS के प्रति नजरिए में नरमी के तौर पर देखा जा रहा है। ऐसी भी कहा जा रहा है कि अमेरिका का SCS पर स्पष्ट नजरिया नहीं होने के कारण दोनों देश इस मुद्दे से दूरी बनाते दिखे।
भारत यात्रा के दौरान आबे और पीएम मोदी की बैठक में काफी मुद्दों पर चर्चा की गई। इसमें OBOR के रूप में चीन की विस्तारवादी नीतियों से निपटने पर भी बात हुई, लेकिन इसमें SCS के मुद्दे पर स्पष्ट बात नहीं की गई। संयुक्त घोषणापत्र में SCS पर चर्चा नहीं करना अहम माना जा रहा है। पिछली दो बैठकों के घोषणापत्र में SCS के बारे में खासकर चर्चा की गई थी और इस इलाके के ऊपर से उड़ान तथा परिवहन की मांग की गई थी। 
माना जा रहा है कि डोकलाम मुद्दे के सफल समाधान और जापान की उत्तर कोरिया के प्रति चिंता के बाद दोनों देशों के संयुक्त घोषणापत्र में SCS को लेकर संयमित रुख अपनाया गया है। बता दें कि डोकलाम में चीन सड़क निर्माण रोकने पर सहमत हो गया था। इसके बाद चीन और भारत की सेनाएं अपने-अपने क्षेत्र में वापस चली गई थीं। मोदी सरकार ने 2014 में अमेरिका के साथ संयुक्त घोषणापत्र में ऐक्ट ईस्ट पॉलिसी के तहत SCS का खास जिक्र किया था। एशिया के कई देश इस क्षेत्र में भारत की उपस्थिति बढ़ाने का भी परामर्श देते रहे हैं। 
भारत द्वारा इस बार SCS मुद्दे का जिक्र नहीं करना मौजूदा अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप से बढ़ते बेरुखी के तौर पर भी देखा जा रहा है। कूटनीतिक मामलों के जानकार ब्रह्म चेलानी के अनुसार भारत और जापान SCS के मुद्दे पर मुश्किल स्थिति में हैं। ट्रंप ने चीन को इस इलाके में पूरी छूट दे रखी है। उन्होंने कहा, '2015 और 2016 के संयुक्त घोषणापत्रों को देखते हुए SCS की चर्चा नहीं करना खास है। भारत और जापान इस बात को इग्नोर नहीं कर सकते हैं कि SCS पर अमेरिका की कोई खास नीति नहीं है।' हालांकि ऐसा भी कहा जा रहा है कि उत्तर कोरिया के लगातार उकसावे वाली नीतियों के कारण अमेरिका SCS पर अपनी नीति बदल भी सकता है। 
ऐसा भी कहा जा रहा है कि अब अमेरिका SCS में निर्बाध परिवहन का समर्थन करने के बारे में विचार कर रहा है। दक्षिणपूर्व एशिया से मिल रही रिपोर्ट के अनुसार फिलहाल ट्रंप और पूरी दुनिया की नजर उत्तर कोरिया पर है और इस बीच चीन SCS में अपनी स्थिति मजबूत करने में जुटा है। बकौल चेलानी बराक ओबामा प्रशासन के दौरान अमेरिका ने चीन को यथास्थिति में बदलाव करने दिया। ट्रंप ने भी SCS में चीन को चुनौती देने की कोई मंशा नहीं दिखाई है। 
भारत और जापान द्वारा 2017 में जारी संयुक्त घोषणापत्र में UNCLOS (यूनाइटेड नेशंस कन्वेन्शन ऑ लॉ ऑफ द सी) की चर्चा तो है, लेकिन इसी पैराग्राफ में यह भी कहा गया है कि इंडो-पसिफिक क्षेत्र की शांति और विकास के लिए मिलकार काम करना होगा।