यमराज बन मौत बांट रहीं देश की सड़कें, हर घंटे 17 की जा रही जान

  • uploaded on : 2017-09-08 11:49:32
यमराज बन मौत बांट रहीं देश की सड़कें, हर घंटे 17 की जा रही जान
 

नई दिल्ली, भारत में हर घंटे करीब 55 एक्सीडेंट होते हैं, जिनमें 17 लोगों की मौत हो जाती है। यानी देश में हर 3.5 मिनट पर एक व्यक्ति सड़क दुर्घटना में जान गंवा देता है। पिछले बुधवार को सड़क और परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने साल 2016 में सड़क हादसों पर एक रिपोर्ट जारी की। रिपोर्ट में जो आंकड़े पेश किए गए हैं वह भारत में सड़कों की बहुत बुरी तस्वीर पेश करती है।
दुर्घटनाएं घटीं, मौतें बढ़ीं
रिपोर्ट के मुताबिक पूरे देश में साल 2016 में 4 लाख 81 हज़ार सड़क हादसे हुए। इन हादसों में करीब 1 लाख 51 हजार लोगों ने अपनी जान गवाई। यहां गौर करने वाली बात यह भी है कि साल 2015 के मुकाबले सड़क दुर्घटनाओं में 4.1 फीसद की कमी आयी, लेकिन एक्सीडेंट में जवान गवाने वालों की संख्या में 3 फीसद की बढ़ोतरी दर्ज की गई। यह आंकड़ा बताता है कि पिछले साल सड़क दुर्घटनाएं कितनी भयानक रहीं।
चेन्नई में ज्यादा हादसे, दिल्ली में मौत ज्यादा
शहरों में सबसे ज़्यादा एक्सीडेंट के मामले दक्षिण भारत के बड़े महानगर चेन्नई में सामने आए। यहां पुछले साल कुल 7,486 सड़क हादसे हुए। सड़क दुर्घटनाओं में जान गवाने के सबसे ज्यादा मामले दिल्ली के हैं, यहां 2016 में 1,591 की मौतें हुईं। राज्यों में होने वाली मौत के मामले में तमिलनाडु टॉप पर है, जिसका सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली कुल मौतों में 14.9 योगदान है। 11.2 फीसद के साथ मध्य प्रदेश दूसरे और 9.2 फीसद के सात कर्नाटक तीसरे स्थान पर है।
इस मामले में दिल्ली के पूर्व ट्रैफिक कमिश्नर मैक्सवेल परेरा ने Jagran.Com से खास बातचीत में बताया कि सड़क दुर्घटनाओं को काफी हद तक कम किया जा सकता है। इसके लिए नागरिकों को ट्रैफिक नियमों का पालन करना होगा। दुपहिया वाहन चालकों का हेलमेट पहनना होगा, कार सवारों को सीट बेल्ट जरूर बांधनी चाहिए और अपनी लेन में ही गाडी चलानी चाहिए।
उन्होंने बताया, भारत में सड़क हादसे रोड इंजीनियरिंग की खामी के चलते भी होते हैं। चालान और फाइन दुर्घटनाओं को कम करने में ज्यादा योगदान नहीं कर सकते। प्रत्येक वाहन चलाने वाला सजग होकर दुर्घटना को टाल सकता है। विदेशों में ट्रैफिक चालान से मिलने वाले पैसों को रोड सेफ्टी पर  खर्च किया जाता है। भारत में भी ऐसा ही कुछ करने की जरूरत है। सरकार को भी रोड सेफ्टी के लिए ज्यादा से ज्यादा जागरुकता अभियान चलाकर लोगों को जागरुक बनाने की जरूरत है।
ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन देता है दुर्घटना को दावत
- अनियंत्रित वाहनों के कारण 72.9 फीसद दुर्घटनाएं हुईं
- ओवर स्पीड के चलते 3,33,446 लाख दुर्घटनाएं हुईं। उनमें 89,141 लोग मारे गए।
- ओवरलोडिंग के कारण 61,325 सड़क हादसे हुए। इनमें 21,302 लोग मारे गए।
- वाहनों की सीधी टक्कर के कारण हुए 55,942 हादसों में 22,962 लोगों की मौत हुई।
- ओवरटेकिंग से 36,604 दुर्घटनाएं हुईं। इनमें 11,398 लोग मारे गए।
- शराब पीकर गाड़ी चलाने से 14,894 हादसे हुए, जिनमें 6,131 लोग मारे गए।
- गाड़ी चलाते वक्त मोबाइल फोन का उपयोग करने से 4,976 दुर्घटनाओं में 2,138 लोगों को जान से हाथ धोना पड़ा।
4 फीसद दुर्घटनाओं के पीछे नाबालिग ड्राइवर
पहली बार नाबालिग ड्राइवरों के आंकड़े भी पेश किए गए हैं। आंकड़ों के मुताबिक कुल दर्घटनाओं में 4 फीसद सड़क हादसों में नाबालिग ड्राइवर शामिल रहे। देश में साल 2016 में होने वाली मौतों में सबसे ज्यादा 25 से 35 आयु वर्ग के लोग मारे गए। सड़क हादसे में मारे गए कुल लोगों में 83 फीसद ऐसे लोग शामिल थे, जिनकी आयु 18 से 60 के बीच थी। रोड़ और सड़क परिवहन सेक्रेट्री यद्घवीर सिंह मलिक ने इसे चिंता की सबसे बड़ी वजह माना।
ड्राइविंग के दौरान मोबाइल भी जान का दुश्मन
रिपोर्ट के मुताबिक 1.8 प्रतिशत लोग मोबाइल पर बात करने के दौरान दुर्घटना के शिकार हुए और मारे गए। दोपहिया वाहनों का सड़क दुर्घटना का शिकार होने का खतरा सबसे ज्यादा होता है। साल 2016 में सड़क दुर्घटनाओं में मरने वालों में 34 फीसद दोपहिया सवार लोग थे। इसमें से 19.3 फीसद लोगों ने हेलमेट नहीं पहना हुआ था। कार, टैक्सी और वैन पर सवार मरने वाले 17.9 प्रतिशत लोग थे।
केंद्रीय सड़क और परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने इतनी बड़ी संख्या में होने वाली सड़क दुर्घटनाओं पर चिंता ज़ाहिर की। उन्होंने कहा- देशभर में जिला स्तर पर रोड सेफ्टी कमेटियां बनायी जाएंगी, जो अपने इलाके में रोड सेफ्टी का रिकॉर्ड रखेंगी। ये कमेटियां लोकल सांसद के देखरेख में काम करेंगी।