कुलभूषण जाधव केस, 18 साल बाद इंटरनैशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस में आमने-सामने हुए भारत-पाकिस्तान

  • uploaded on : 2017-05-14 17:15:38
कुलभूषण जाधव केस, 18 साल बाद इंटरनैशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस में आमने-सामने हुए भारत-पाकिस्तान
 

नई दिल्ली भारत और पाकिस्तान करीब 18 साल बाद एक बार फिर इंटरनैशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस (आईसीजे) में आमने-सामने हैं। इस बार मामला भारत के कुलभूषण जाधव को एक पाकिस्तानी सैन्य अदालत द्वारा फांसी की सजा सुनाने के खिलाफ भारत द्वारा आईसीजे का दरवाजा खटखटाये जाने का है। 18 साल पहले इस्लामाबाद ने अपने एक नौसैनिक विमान को मार गिराये जाने के बाद ICJ से हस्तक्षेप की गुहार लगाई थी। हालांकि कोर्ट ने पाकिस्तान के दावे को खारिज कर दिया था।
नीदरलैंड के हेग में संयुक्त राष्ट्र के प्रधान न्यायिक अंग आईसीजे के पीस पैलेस के ग्रेट हॉल ऑफ जस्टिस में जन सुनवाई होगी। यहां विवादित जाधव मामले पर दोनों पक्षों से अपना मत रखने को कहा जाएगा। भारत ने आठ मई को आईसीजे में याचिका दायर कर 46 वर्षीय कुलभूषण जाधव के लिये न्याय की मांग की थी। 
भारत का कहना है कि पाकिस्तान ने पूर्व नौसैनिक अधिकारी से दूतावास संपर्क के लिए दिये गये 16 आवेदनों की अनदेखी कर वियना संधि का उल्लंघन किया। पाकिस्तान की एक सैन्य अदालत ने पिछले महीने जाधव को कथित तौर पर जासूसी और विध्वंसक गतिविधियों के आरोप में मौत की सजा सुनाई थी। पाकिस्तान ने जाधव के परिवार द्वारा वीजा के लिये किये गये आवेदन पर भी कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। जाधव को पिछले साल तीन मार्च को गिरफ्तार किया गया था। इससे पहले 10 अगस्त 1999 को कच्छ क्षेत्र में भारतीय वायु सेना ने एक पाकिस्तानी समुद्री टोही विमान अटलांटिक को मार गिराया था। 
विमान में सवार सभी 16 नौसैनिकों की मौत हो गई थी। पाकिस्तान का दावा था कि विमान को उसके वायुक्षेत्र में मार गिराया गया और उसने भारत से 6 करोड़ अमेरिकी डॉलर के मुआवजे की मांग की। अदालत की 16 जजों की पीठ ने 21 जून 2000 को 14-2 से पाकिस्तान के दावे को खारिज कर दिया था।